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Saharsa News: सहरसा नगर निगम में 421 विभागीय कार्यों की जांच, नगर आयुक्त पर कार्रवाई की सिफारिश

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सहरसा नगर निगम के 421 विभागीय कार्यों और टेंडर प्रक्रिया की जांच में अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच समिति ने नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की।

सहरसा, बिहार: सहरसा नगर निगम में विभागीय कार्यों के क्रियान्वयन और निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। नगर विकास विभाग की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। समिति की रिपोर्ट में आठ महीने के दौरान कराए गए 421 विभागीय कार्यों, ठेकेदारों के चयन और निविदा संबंधी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

यह मामला पूर्व मंत्री आलोक रंजन की शिकायत के बाद जांच के दायरे में आया। शिकायत मिलने पर नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद विभाग ने पांच सदस्यीय समिति गठित कर आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और स्थलीय परिस्थितियों की पड़ताल कराई।

पांच सदस्यीय समिति ने की जांच

जांच समिति का नेतृत्व नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार ने किया। समिति में अधीक्षण अभियंता हरेंद्र कुमार उपाध्याय, आंतरिक वित्तीय सलाहकार सुभाष कुमार, उप सचिव परमानंद पांडेय और सहायक अभियंता सौरभ कुमार को शामिल किया गया था।

समिति ने 20 से 22 अगस्त 2026 के बीच सहरसा पहुंचकर शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच की। इसके बाद तैयार अंतिम समीक्षा रिपोर्ट 21 सितंबर 2026 को नगर विकास विभाग को सौंप दी गई।

रिपोर्ट में विभिन्न योजनाओं के संचालन, विभागीय निर्देशों के अनुपालन और निविदा प्रक्रिया से संबंधित कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं।

आठ महीने में 421 विभागीय कार्य कराने का मामला

जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रभात कुमार झा ने 21 जून 2025 को सहरसा नगर निगम के नगर आयुक्त का पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद जुलाई 2025 से फरवरी 2026 के बीच आठ महीने की अवधि में 421 विभागीय कार्य कराए गए।

समिति ने इन कार्यों के लिए नगर निगम के छह विभागीय कर्मचारियों को अभिकर्ता बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में इस व्यवस्था के तहत कराए गए कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की बात कही गई है।

सरकारी कार्यों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, अभिकर्ताओं का चयन किस आधार पर किया गया और योजनाओं के क्रियान्वयन में नियमों का अनुपालन किस तरह हुआ, ये सभी बिंदु जांच के केंद्र में रहे।

निविदा प्रक्रिया और योजनाओं के बंटवारे पर आपत्ति

समिति की रिपोर्ट में निविदा आमंत्रण सूचना यानी एनआईटी से जुड़े नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कुछ योजनाओं को अलग-अलग योजनाओं में बांटकर निविदा कराई गई और एक खास अभिकर्ता को लाभ पहुंचाने की स्थिति बनी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विभागीय आदेशों की अनदेखी कर निजी लाभ पहुंचाने संबंधी आरोपों की जांच में गंभीर खामियां सामने आईं। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और किसी अंतिम दंडात्मक आदेश की स्थिति अलग से स्पष्ट होना आवश्यक है।

अवैध वसूली और प्राथमिकी को लेकर भी सवाल

जांच रिपोर्ट में उप विकास आयुक्त, सहरसा के जांच प्रतिवेदन का हवाला देते हुए शहर के दस अन्य स्थानों से कथित अवैध वसूली का मुद्दा भी उठाया गया है।

इसके अलावा, समिति ने आरोप लगाया कि एक मामले में विभागीय निर्देशों के विपरीत किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई और विभाग को भ्रामक जानकारी दी गई। समिति ने इस पूरे प्रकरण में संबंधित अभिलेखों और जांच निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई की अनुशंसा की है।

विभागीय और कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा

पांच सदस्यीय समिति का कहना है कि शिकायतों, स्थल निरीक्षण और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के दौरान आरोपों की पुष्टि हुई। इसी आधार पर नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में अनियमितताओं से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करने और जहां अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ हो, वहां नियमानुसार वसूली पर भी जोर दिया गया है।

अब इस मामले में नगर विकास विभाग की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच समिति की सिफारिश अपने आप में अंतिम दंडादेश नहीं है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष, विभागीय निर्णय और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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